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"मुक्ति दिलाये यीशु नामु" अगस्त 31, 2019

Aug 30, 2019

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"मुक्ति दिलाये यीशु नामु" अगस्त 31, 2019 
"तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन किया, 
अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन किया, 
नर नारी उसने मनुष्यों की सृष्टि की"| 
(उतपति 1:27) 
पुत्र मैंने तुम्हें इस लिए रचा है कि तुम मेरी संगति में रहो। मेरी संगति तुम्हारा वाजूद मिटाने के लिए नहीं बल्कि तुम्हें भरपूर जीवन देने के लिए है। जब तुम मेरे बिना जीवन जीते हो तुम स्वं को अधूरा सा महसूस करते हो क्योंकि तुम्हारे जीवन में मेरा होना आवश्यक है और मेरे न होने से तुम सही अर्थों में अधूरे हो। पुत्र मेरे बिना तुम स्वं से ही हार जाते हो तथा मेरे पीछे चलकर तुम संसार को भी जीत सकते हो क्योंकि संसार को मैंने जीत लिया है। 
पुत्र आनँद भरपुर जीवन के लिए तुम मेरी संगति में जिओ। आओ मेरे पास आओ, आओ स्वं की होंद को त्याग कर मेरे पास आओ। आओ स्वं से मुकरते हुए मेरे पास आओ तांकि तुम मेरे से जीवन का मूल मकसद जान सको। पुत्र मैं तुम्हें रहस्सयबाद के रास्तों पर ले जाऊंगा जिनकी तुम ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। पुत्र मेरे में विश्वास रखो क्योंकि मैं आदि और अंत हूँ, मैं अल्फ़ा और ओमेगा हूँ। यह सृष्टि मेरे ही हाथों की रचना है। क्योंकि तुम भी मेरी रचना हो इस लिए मैं तुम्हारे बारे में सभ कुछ जानता हूँ यहां तक कि तुम्हारे सर के बाल भी मेरे गिने हुए हैं। पुत्र तुम मेरे बिना कुछ भी नहीं हो तथा तुम्हें फिर से पूर्ण होने के लिए मेरी संगति की आवश्यकता है। मेरी संगति तुम्हें फिर से पृथ्वी पर अधिकारी बनाएगी जिसके लिए मैंने तुम्हें आरंभ में रचा था।
 "परमेश्वर ने उन्हें आशीष दी और उनसे कहा, 
"फूलो फलो और पृथ्वी को भर दो, और 
उसको अपने वश में कर लो और 
समुन्दर की मछलियां तथा आकाश के पक्षियों और
पृथ्वी पर रेंगने वाले सभी जन्तुओं पर 
अपना अधिकार जमा लो"।
(उतपति 2:7) 
वचन: उत्पति 1:27 तथा 2:7 मरकुस 8:36, भजन संहिता 139:13, 2 कुरनथियां 3:17-18 
www.punjabichristianfellowship.org

"मुक्ति दिलाये यीशु नामु" अगस्त 31, 2019 


"तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन किया, 

अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन किया, 

नर नारी उसने मनुष्यों की सृष्टि की"| 

(उतपति 1:27) 


पुत्र मैंने तुम्हें इस लिए रचा है कि तुम मेरी संगति में रहो। मेरी संगति तुम्हारा वाजूद मिटाने के लिए नहीं बल्कि तुम्हें भरपूर जीवन देने के लिए है। जब तुम मेरे बिना जीवन जीते हो तुम स्वं को अधूरा सा महसूस करते हो क्योंकि तुम्हारे जीवन में मेरा होना आवश्यक है और मेरे न होने से तुम सही अर्थों में अधूरे हो। पुत्र मेरे बिना तुम स्वं से ही हार जाते हो तथा मेरे पीछे चलकर तुम संसार को भी जीत सकते हो क्योंकि संसार को मैंने जीत लिया है। 


पुत्र आनँद भरपुर जीवन के लिए तुम मेरी संगति में जिओ। आओ मेरे पास आओ, आओ स्वं की होंद को त्याग कर मेरे पास आओ। आओ स्वं से मुकरते हुए मेरे पास आओ तांकि तुम मेरे से जीवन का मूल मकसद जान सको। पुत्र मैं तुम्हें रहस्सयबाद के रास्तों पर ले जाऊंगा जिनकी तुम ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। पुत्र मेरे में विश्वास रखो क्योंकि मैं आदि और अंत हूँ, मैं अल्फ़ा और ओमेगा हूँ। यह सृष्टि मेरे ही हाथों की रचना है। क्योंकि तुम भी मेरी रचना हो इस लिए मैं तुम्हारे बारे में सभ कुछ जानता हूँ यहां तक कि तुम्हारे सर के बाल भी मेरे गिने हुए हैं। पुत्र तुम मेरे बिना कुछ भी नहीं हो तथा तुम्हें फिर से पूर्ण होने के लिए मेरी संगति की आवश्यकता है। मेरी संगति तुम्हें फिर से पृथ्वी पर अधिकारी बनाएगी जिसके लिए मैंने तुम्हें आरंभ में रचा था।


 "परमेश्वर ने उन्हें आशीष दी और उनसे कहा, 

"फूलो फलो और पृथ्वी को भर दो, और 

उसको अपने वश में कर लो और 

समुन्दर की मछलियां तथा आकाश के पक्षियों और

पृथ्वी पर रेंगने वाले सभी जन्तुओं पर 

अपना अधिकार जमा लो"।

(उतपति 2:7) 


वचन: उत्पति 1:27 तथा 2:7 मरकुस 8:36, भजन संहिता 139:13, 2 कुरनथियां 3:17-18 


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